मुकेश अंबानी

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रिलायंस इंडस्ट्रीज के हाल में बंद हुए 53,124 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू में मुकेश अंबानी को कंपनी के 5.52 लाख शेयर मिले हैं। कंपनी ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह जानकारी दी। अंबानी के पास अब रिलायंस इंडस्ट्रीज के 80.52 लाख शेयर हो गए हैं। राइट्स इश्यू से पहले उनके पास 75 लाख शेयर थे। अब उनके पास कंपनी के 0.12 फीसदी शेयर हो गए हैं।

अंबानी की पत्नी नीता और बच्चों ईशा, आकाश और अनंत को भी राइट्स इश्यू में 5.52-5.52 लाख शेयर मिले हैं। इनके पास भी अब कंपनी के 0.12-0.12 फीसदी शेयर हो गए हैं। कुल मिलाकर राइट्स इश्यू में प्रवर्तक समूह को 22.50 करोड़ शेयर मिले हैं। इसके साथ ही कंपनी में प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी 50.29 फीसदी हो गई है, जो पहले 50.07 फीसदी थी।

LIC के पास 37.18 करोड़ शेयर
इसके साथ ही कंपनी में सार्वजनिक शेयरधारिता 49.93 फीसदी से घटकर 49.71 फीसदी पर आ गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने राइट्स इश्यू में 2.47 करोड़ शेयर हासिल किए हैं। इससे एलआईसी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के 37.18 करोड़ शेयर या छह फीसदी हिस्सेदारी हो गई है। कुल मिलाकर सार्वजनिक शेयरधारकों ने राइट्स इश्यू में 19.74 करोड़ शेयर हासिल किए।

30 अप्रैल को की थी घोषणा 
अंबानी की कंपनी ने 30 अप्रैल को 53,124 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू की घोषणा की थी। यह देश का सबसे बड़ा राइट्स इश्यू रहा। इसके तहत प्रत्येक 15 शेयर के लिए एक शेयर की पेशकश 1,257 रुपये के मूल्य पर की गई थी। यह 30 अप्रैल को कंपनी के शेयर के बंद मूल्य से 14 प्रतिशत कम था। इस इश्यू को 1.6 गुना अभिदान मिला। शेयरों के लिए कुल 84,000 करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं।

क्या है राइट्स इश्यू?
दरअसल पूंजी जुटाने के लिए शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियां राइट्स इश्यू लाती हैं। राइट्स इश्यू के जरिए कंपनियां अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने के लिए मंजूरी देती हैं। शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में शेयर खरीद सकते हैं, जो कंपनी तय करती है। यानी शेयरधारक कंपनी की ओर से तय अवधि में राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं। हालांकि इसके जरिए कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता है।

राइट्स पेशकश के जरिए कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों को घटी दरों पर नए शेयर खरीदने का अधिकार देती हैं, लेकिन उन पर ऐसा करने की बाध्यता नहीं होती। आरआईएल ने अंतिम बार 1991 में परिवर्तनीय ऋणपत्र जारी कर जनता से धन जुटाया था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के हाल में बंद हुए 53,124 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू में मुकेश अंबानी को कंपनी के 5.52 लाख शेयर मिले हैं। कंपनी ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह जानकारी दी। अंबानी के पास अब रिलायंस इंडस्ट्रीज के 80.52 लाख शेयर हो गए हैं। राइट्स इश्यू से पहले उनके पास 75 लाख शेयर थे। अब उनके पास कंपनी के 0.12 फीसदी शेयर हो गए हैं।

अंबानी की पत्नी नीता और बच्चों ईशा, आकाश और अनंत को भी राइट्स इश्यू में 5.52-5.52 लाख शेयर मिले हैं। इनके पास भी अब कंपनी के 0.12-0.12 फीसदी शेयर हो गए हैं। कुल मिलाकर राइट्स इश्यू में प्रवर्तक समूह को 22.50 करोड़ शेयर मिले हैं। इसके साथ ही कंपनी में प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी 50.29 फीसदी हो गई है, जो पहले 50.07 फीसदी थी।

LIC के पास 37.18 करोड़ शेयर

इसके साथ ही कंपनी में सार्वजनिक शेयरधारिता 49.93 फीसदी से घटकर 49.71 फीसदी पर आ गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने राइट्स इश्यू में 2.47 करोड़ शेयर हासिल किए हैं। इससे एलआईसी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के 37.18 करोड़ शेयर या छह फीसदी हिस्सेदारी हो गई है। कुल मिलाकर सार्वजनिक शेयरधारकों ने राइट्स इश्यू में 19.74 करोड़ शेयर हासिल किए।

30 अप्रैल को की थी घोषणा 
अंबानी की कंपनी ने 30 अप्रैल को 53,124 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू की घोषणा की थी। यह देश का सबसे बड़ा राइट्स इश्यू रहा। इसके तहत प्रत्येक 15 शेयर के लिए एक शेयर की पेशकश 1,257 रुपये के मूल्य पर की गई थी। यह 30 अप्रैल को कंपनी के शेयर के बंद मूल्य से 14 प्रतिशत कम था। इस इश्यू को 1.6 गुना अभिदान मिला। शेयरों के लिए कुल 84,000 करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं।

क्या है राइट्स इश्यू?
दरअसल पूंजी जुटाने के लिए शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियां राइट्स इश्यू लाती हैं। राइट्स इश्यू के जरिए कंपनियां अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने के लिए मंजूरी देती हैं। शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में शेयर खरीद सकते हैं, जो कंपनी तय करती है। यानी शेयरधारक कंपनी की ओर से तय अवधि में राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं। हालांकि इसके जरिए कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता है।

राइट्स पेशकश के जरिए कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों को घटी दरों पर नए शेयर खरीदने का अधिकार देती हैं, लेकिन उन पर ऐसा करने की बाध्यता नहीं होती। आरआईएल ने अंतिम बार 1991 में परिवर्तनीय ऋणपत्र जारी कर जनता से धन जुटाया था।

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