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‘बेंत की तरह झुक जाओ, जब तक बाढ़ का पानी उतर न जाए.’ – इतालवी कहावत

जैसे सिर्फ इटली ही नहीं यूरोप के कई हिस्सों में कोरोना वायरस ने कहर बरपाया है, उसी तरह इटली के साथ ही यूरोप के कई और अमेरिका के कुछ हिस्सों में माफिया वैश्विक महामारी का पूरा फायदा उठाने की कोशिश में है. यानी एक वायरस के कारण व्यवस्था का एक और वायरस पनपने की फिराक में है. एक तरफ, गरीब और बेसहारा लोगों के बीच इस माफिया का एक चेहरा नज़र आ रहा है तो एक छुपा हुआ चेहरा भी है. आइए देखें क्या है पूरी तस्वीर.

इटली में माफिया
कोविड 19 महामारी के समय में लॉकडाउन की स्थिति हो या संक्रमण के चलते आइसोलेशन की, अंडरवर्ल्ड अपनी गतिविधियां संचालित करने के तरीके निकाल ही लेता है. ड्रग्स का कारोबार तो जारी है ही, लेकिन जो थोड़ी बहुत कमी उसमें आई है, उसकी भरपाई दूसरे तरीकों से पूरी हो रही है. लेकिन, चोरी छुपे. लोगों के सामने तो माफिया का चेहरा किसी मसीहा से कम नहीं है.महामारी की पूरी किट

इटली में कोविड 19 से भारी तबाही के कारण मेडिकल सुविधाएं या तो आम लोगों की पहुंच में नहीं हैं या ​बेतहाशा महंगी हो चुकी हैं. ऐसे में, गार्जियन की रिपोर्ट की मानें तो इटली की पुलिस अलर्ट जारी कर चुकी है कि आपराधिक गैंग्स लोगों को ‘एपिडेमिक किट’ बांट रहे हैं, जिसमें दस्ताने, सैनिटाइज़र, फेस मास्क शामिल हैं.

हर मदद के लिए माफिया
माफिया विरोधी अधिकारियों और शोधकर्ताओं के हवाले से सीएनएन ने लिखा है कि माफिया खास तौर से दक्षिणी इटली में महामारी का पूरा फायदा उठा रहा है. गरीब बस्तियों में रोज़ की ज़रूरतों की हर चीज़ बांटी जा रही है. और इन कामों के लिए अरबों यूरो के फंड अंदर ही अंदर जारी किए जा रहे हैं.

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सबसे बड़े बैंक हैं गैंग्स
इटली में पहले भी संकटों के समय माफिया एक तरह से सबसे बड़े बैंक साबित हो चुके हैं. इस बार भी रिपोर्ट कह रही है कि ये गैंग्स सामान्य स्थितियों में कुछ कारोबारों को 50 से 70 फीसदी की ब्याज दरों पर कर्ज देते थे लेकिन इस समय में बैंकों से भी कम ब्याज दरों पर पैसा मुहैया करवाकर मसीहा बन रहे हैं.

‘जब आप भूखे होते हैं, तो आप ये नहीं देखते कि रोटी किस चूल्हे से मिल रही है. या जब ज़िंदगी और मौत की लड़ाई में होते हैं तो ये नहीं देखते कि दवा कौन बेच रहा है. चुनने के विकल्प आपके पास शांति और समृद्धि के समय होते हैं, संकट के समय नहीं.’

– रॉबर्टो सैवियानो, माफिया विशेषज्ञ

क्या है माफिया की मंशा?
इस महीने की शुरूआत में पोप फ्रांसिस की उस प्रार्थना संबंधी खबरों का ज़िक्र था, जिसमें पोप ने महमारी के संकट के समय में आम लोगों के लिए प्रार्थना की थी:

‘इस महामारी की आपदा के समय जो लोग ज़रूरतमंदों के साथ कारोबार करते हैं और उनकी ज़रूरतों से मुनाफा कमाते हैं, यानी माफिया, सूदखोर और ऐसे ही लोग, ईश्वर उनके हृदय को छुए और बदल दे.’

बदलाव एक आदर्श की कल्पना तो है, लेकिन यह कितना मुमकिन है? क्या मसीहा नज़र आ रहा माफिया सच में बदल गया है? या इसका कोई छुपा हुआ एजेंडा है? बेशक है. लंबे समय से पनपा यह माफिया पिछले कुछ दशकों में प्रॉपर्टी, हॉस्पिटैलिटी, औद्योगिक लॉंड्री, ट्रांसपोर्ट, अंतिम संस्कार गृहों, अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य वितरण जैसे मूलभूत आवश्यकताओं वाले सेक्टरों सहित हेल्थ सेक्टर में भारी निवेश कर चुका है.

हेल्थ सेक्टर में माफिया
एन्ड्रांगेटा (Ndrangheta), इटली बेस्ड सबसे बड़ा ड्रग माफिया है, जो यूरोप के 80 फीसदी ड्रग्स अंडरवर्ल्ड को नियंत्रित करता है. गार्जियन की रिपोर्ट की मानें तो इटली में कोविड 19 के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरे लोंबार्डी सहित कई शहरों में इस माफिया ने हेल्थ सेक्टर में फार्मा और स्वास्थ्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों में भारी निवेश किया है.

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सुरक्षा और वसूली
माफिया संबंधी एक पोर्टल एमएनडी ने लिखा है कि इतालवी अखबार ‘ला रिपब्लिका’ का दिए इंटरव्यू में अपराध नियंत्रण प्रमुख फ्रैंकेसो मेसिना के मुताबिक ‘संकट के समय माफिया जिस तरह लोगों को डूबे व्यवसाय बचाने के लिए पैसा दे रहा है, संकट से उबरते ही इन सब व्यवसायों पर माफिया का कब्ज़ा होगा.’ सुरक्षा देने के नाम पर वसूली का पुराना धंधा फिर शुरू होगा.

वोटों पर है नज़र
माफिया की इन तमाम गतिविधियों से सरकार भी वाकिफ है. सीएनएन ने आंतरिक मंत्री के उस पत्र का अपने पास होने का दावा करते हुए लिखा है जिसमें चेतावनी है, ‘आपराधिक संगठन ‘इस दिखावे की मदद’ से लोकप्रियता पाना चाहते हैं.’ विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस लोकप्रियता को ये संगठन कई तरह से भुनाएंगे और चिंता की बात है कि शायद यह वोटों के लिए न हो. यानी सरकार में सीधे आने के लिए महामारी में माफिया भूमिका रच रहा है.

अर्थव्यवस्था पर बड़ा नियंत्रण
इटली सहित यूरोप के कई हिस्सों की अर्थव्यवस्था पर माफिया का बड़ा नियंत्रण रहा है. 2008 में मंदी के समय में जब बैंक डूब रहे थे, तब इन आपराधिक संगठनों के पास अरबों यूरो का खज़ाना था. यही अब भी हो रहा है. एक समानांतर व्यवस्था माफिया के हाथों में है. लंदन, नीदरलैंड्स, स्विटज़रलैंड, लक्ज़ैमबर्ग आदि जगहें इन संगठनों के लिए टैक्स का स्वर्ग बन चुकी हैं और यहां से वैधानिक धंधों में अंडरवर्ल्ड का पैसा लगता रहा है. माफिया पर कई किताबों के लेखक सैवियानो के मुताबिक जर्मनी में गोलीबारी कम होती है, लेकिन माफिया वहां बहुत शक्तिशाली है.

माफिया की दबंगई का नमूना
जब इटली में देशव्यापी लॉकडाउन था, तब इसी महीने की शुरूआत में मेसिना शहर में एक शवयात्रा निकली, जिसमें कई लोग शामिल हुए, जबकि निर्देश साफ थे कि लोग इकट्ठे न हों. लेकिन यह शवयात्रा एक माफिया गैंग के 70 वर्षीय पूर्व सरगना की थी. वहीं मेक्सिको में, चिहुआहुआ राज्य में इसी महीने गैंग्स के बीच हुए शूटआउट में 19 लोगों की सरेआम मौत हुई लेकिन कोरोना संकट के चलते इस खबर को प्रमुखता नहीं मिली.

एक और खबर थी कि कोरोना संक्रमण के चलते इटली में दर्जनों माफिया सरगनाओं को जेल से छोड़ा जा रहा है ताकि संक्रमण से बच सकें. वहीं, ताज़ा हालात के मुताबिक अब लॉकडाउन तक अदालतें इटली में सक्रिय नहीं है.

मेक्सिको व ब्राज़ील में माफिया
सिर्फ इटली या यूरोप ही नहीं बल्कि मेक्सिको में ड्रग कार्टेल मसीहा बनने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. जैलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल रोज़मर्रा की चीज़ें एक एनजीओ और दान के लेबल के साथ बांट रहा है तो दूसरी तर​फ, अमेरिकी जेल में कैद एल चापो का सीनालोआ कार्टेल मदद के पैकेट चापो के छपे चित्र के साथ बांट रहा है.

दूसरी तरफ, ब्राज़ील में आपराधिक गैंगों ने एक तरह से प्रशासन अपने हाथ में ले लिया है. कोविड 19 संक्रमण के मद्देनज़र ब्राज़ीली सरकार की उदासीनता देखते हुए गैंगों ने कर्फ्यू और आइसोलेशन जैसे निर्देश जारी किए हैं और दबंगई के दम पर लोगों को निर्देशों का पालन करवाया जा रहा है. साथ ही, ज़रूरी चीज़ों के लिए उनकी मदद भी गैंग कर रहे हैं.

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नीदरलैंड्स के एम्सटरडम में एक कॉफी शॉप पर गांजा बांटे जाने का यह चित्र गार्जियन ने छापा.

ड्रग्स का धंधा जारी है?
लॉकडाउन के बावजूद क्या ऐसा संभव है? रिपोर्टों की मानें तो कुछ फर्क तो पड़ा है लेकिन ज़्यादा नहीं. एक जर्मन अखबार ने लिखा कि दक्षिण अमेरिकी और अफ्रीकी रूट से जर्मनी में पहले से ज़्यादा ड्रग्स पहुंच रही है. लॉकडाउन के चलते खपत भी कम नहीं है क्योंकि लोग अकेलेपन और डिप्रेशन के लिए ड्रग्स ले रहे हैं. इटली में ड्रग्स काउंटरों की जगह घर तक पहुंचाई जा रही है. नीदरलैंड्स में कॉफी शॉप जैसी दुकानों के ज़रिये गैंग गांजे की सप्लाई कर रहे हैं.

संकट के बाद क्या होगा?
यह पूरा परिदृश्य क्या कह रहा है? माफिया आम लोगों की हमदर्दी और लो​कप्रियता हासिल कर रहा है, आम जनजीवन से जुड़े हर सेक्टर में उसका निवेश है, अर्थव्यवस्था उसके इशारों पर है, धंधा बदस्तूर जारी है और छवि बेहतर एवं वैधानिक हो रही है. इस संकट के बाद माफिया सीधे सरकार में आने की कोशिश कर सकता है. वैसे भी माफिया का दशकों और सदियों पुराना कारोबार सुरक्षा और प्रशासन ही रहा है.

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