कोरोना से निपटने में जुटा बिहार का 'लाल', IAS अधिकारी के कार्य की हो रही प्रशंसा

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पटना: पूरा देश इस समय कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित है. केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक इस संक्रमण से बचाव के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं. इसमें तमाम सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान, चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिस और सरकारी अधिकारी सहित तमाम लोग सरकार के साथ कंधा से कंधा मिलकर, इस आपदा से लोगों को बचाने में जुटे हैं.

इसी क्रम में, एक ऐसा ही नाम है उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी के रूप में तैनात जिलाधिकारी रविंद्र कुमार का. मूलत: बिहार के बेगूसराय जिले के निवासी रविंद्र कुमार का जन्म एक किसान परिवार में हुआ और वह 2011 बेच के आईएएस अधिकारी हैं. लेकिन कोरोना काल में रविंद्र कुमार के कार्य की सराहना हर कोई कर रहा है.

तकनीक का लिया सहारा
दरअसल, कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हर कोई नए-नए तरीके अपना रहा है. लेकिन जिला अधिकारी रविंद्र कुमार ने तकनीक के सहारे इससे बचाव के गुण अपनाए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉकडाउन (Lockdown) का दूसरा फेज शुरू होने के बाद, रवींद्र कुमार एक दिन कंट्रोल रूम में अधिकारियों संग बैठक कर रहे थे कि, तभी उन्हें किसी ने सूचना दी कि, जिले में रहने वाला एक छात्र रोबोट (Robotic) बनाना जानता है. उन्होंने बिना समय गंवाए उस छात्र को बुलाया और उससे ‘टच फ्री हैंड सेनेटाइजर’ देने वाला रोबोट बनाने को कहा.

1 हफ्ते में रोबोट तैयार
छात्र ने सात दिन के भीतर ही रोबोट तैयार कर दिया. इसके बाद, इसे कंट्रोलरूम के गेट पर रखवाया गया. इस रोबोट के हाथ के नीचे हाथ ले जाने पर यह सेनिटाइजर (Sanitizer) रिलीज करता है. इससे एक ही बोतल को बार-बार छूकर उससे सेनेटाइजर निकालने से होने वाले संक्रमण की आशंका समाप्त हो जाती है.

तापमान अधिक होने पर बज जाता है अलार्म
इतना ही नहीं, जिलाधिकारी रवींद्र कुमार के कमरे के बगल में बने कोविड कंट्रोल रूम के दरवाजे पर ‘डोर फेम मेटल डिटेक्टर’ भी लगा है. इसमें ‘ऑटोमैटिक बॉडी थर्मल स्कैनिंग डिवाइस’ और सीसीटीवी कैमरा भी लगा है. इस डिवाइस से गुजरने वाले हर व्यक्ति की न केवल दूर से थर्मल स्कैनिंग हो जाती है, बल्कि सीसीटीवी की मदद ने कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर वीडियो भी आ जाता है. इससे यह पता चलता है कि, कंट्रोलरूम में आने वाले किस आदमी का ‘तापमान’ कितना है. वहीं, अगर तापमान अधिक है तो अलार्म भी बजता है और व्यक्ति को तुरंत कंट्रोल रूम के भीतर आने से मना कर दिया जाता है.

वहीं, एक अन्य रोबोट बनवाकर डीएम ने उसे कोविड अस्पताल में मरीजों तक भोजन और दवाएं पहुंचाने के लिए दिया. यह रोबोट एक गाड़ी की शक्ल में है, जिसमें सामान रखकर उसे रिमोट के जरिए मरीज के बेड तक पहुंचाया जाता है. मरीज रोबोट से भोजन और दवाएं निकाल लेता है. इससे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के मरीज के पास न जाने से उनके संक्रमित होने की आशंका भी लगभग खत्म हो जाती है.

कोरोना से निपटने के लिए कोर टीम का निर्माण
इधर, कोरोना से निपटने के मद्देनजर रवींद्र कुमार ने एक कोर टीम बनाई है. इसमें जिले के तमाम अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई है. इसका नतीजा यह हुआ कि, जब लॉकडाउन लागू हुआ तब बुलंदशहर में अधिकारियों की पूरी टीम मुस्तैदी से जुटी थी.

अचानक लॉकडाउन होने के बाद जरूरी सेवाएं लोगों के दरवाजे तक पहुंचती रही. इतना ही नहीं, रविंद्र कुमार ने कोरोना से जुड़े चिकित्सा सामानों को भी जिले में उपलब्ध कराया. साथ ही, अब बीमारी की रोकथाम के लिए रवींद्र ने जिले में ‘आपरेशन कोरोना हंट’ शुरू किया.

500 से ज्यादा थर्मल स्कैनर खरीदे गए
इसमें बिना किसी सरकारी धन का उपयोग किए लोगों के सहयोग से 500 से ज्यादा थर्मल स्कैनर खरीदे गए. स्वास्थ्य विभाग में तैनात दो सौ एएनएम को थर्मल स्कैनर, पीपीइ किट (PPE Package), मास्क, हेड कवर, ग्लव्स से लैस करके अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई. इसके अलावा 40 सर्विलांस की टीमें भी बनाई गईं. जिन्हें अलग-अलग तरीके का काम दिया गया है.

महिलाओं का कर रहे उत्साहवर्धन
वहीं, रविंद्र कुमार सिर्फ बुलंदशहर में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ही प्रयासरत नहीं हैं, बल्कि दूसरी तरफ देश की प्रगति में योगदान दे रही हैं स्‍वयं सहायता समूह और एनजीओ की महिलाओं का लगातार उत्‍साहवर्धन भी कर रहे हैं.

महिलाएं कर रही मास्क का निर्माण
दरअसल, कोरोना काल में बुलंदशहर के ग्रामीण क्षेत्र में स्‍वयं सहायता समूहों की महिलाएं मास्‍क (Masks) का निर्माण कर रही हैं और स्‍थानीय प्रशासन की मदद से, इन मास्‍क की सप्‍लाई पूरे देश में की जा रही है. वहीं, जिला प्रशासन इन महिलाओं की हरसंभव मदद कर रहा है.

केंद्रीय मंत्री ने की प्रशंसा
जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर जिले में पांच स्‍वयं सहायता समूह और दो एनजीओ (NGO) की महिलाएं रोजाना हजारों की संख्‍या में मास्‍क और डिजाइनर मास्‍क तैयार कर रही हैं. वहीं, बुलंदशहर जिले की महिलाओं के कार्यों की प्रशंसा खुद केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी (Smiriti Irani) और गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने भी की है.

माउंट एवरेस्ट की चोटी को किया फतह
गौरतलब है कि, बुलंदशहर के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार न सिर्फ प्रशासनिक कार्यों में जी जान से लगे हुए हैं, बल्कि वह दो बार माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) की चोटी भी फतह कर चुके हैं. साथ ही, रविंद्र कुमार ने ‘मेनी एवरेस्ट्स’ नाम से किताब भी लिखा है.



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