जयपुर: वंचितों को अधिकार दिलाने की मांग, जन संगठनों का प्रदर्शन

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विष्णु शर्मा, जयपुर: विभिन्न जन संगठनों की ओर से 1 जून को राष्ट्रीय शोक एवं आक्रोश दिवस के रूप में मनाया गया. संगठनों ने लॉक डाउन के दौरान बेरोजगार हुए श्रमिकों रोजगार रोजी रोटी दिलाने सहित अन्य प्रबंध करने की मांग की है. इस संबंध में जिला कलेक्टर के जरिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया है. जन संगठनों की ओर से ज्ञापन में मजदूरों को लेकर किए गए कार्यों में रही खामियों की ओर ध्यान दिलाने के साथ ही कुछ सुझाव भी दिए गए हैं. 

जयपुर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर विभिन्न जन संगठनों की ओर से लॉकडाउन के दौरान मारे गए लोगों के लिए 2 मिनट का मौन रखकर प्रदर्शन की शुरुआत की.

इस अवसर पर पीयूसीएल राजस्थान, जनरल एंव निर्माण मजदूर यूनियन,  भारतीय महिला फेडरेशन, मजदूर किसान शक्ति संगठन, भारत ज्ञान विज्ञानं समिति, राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन, सूचना रोजगार अधिकार अभियान, रोजी रोटी अधिकार अभियान आदि संगठन एंव अभियानों की और से यह प्रदर्शन किया गया. 

भारत ज्ञान विज्ञान समिति से जुडी कोमल श्रीवास्तव ने कहा कि देश के सभी नागरिक और विशेष तौर पर मजदूर और किसान कोरोना वायरस की वजह से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं और 742 से अधिक मजदूर पैदल चलते हुए भूख प्यास या ट्रेन, बस या अन्य दुर्घटनाओं में मारे गए हैं. इन मारे गए मजदूरों और किसानों के पीछे उनका पूरा परिवार जो उनकी कमाई पर जिन्दा था. केंद्र सरकार ने सही समय पर उनकी मदद की होती तो शायद ये हालत नहीं बनते और हमारे देश के मजदूरों और किसानो की जानें बचाई जा सकती थी. 

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अन्न भंडार भरे पड़े फिर भी भूखे मर रहे मजदूर
जयपुर जिला कलेक्ट्रेट के बाद भारतीय खाध्य निगम के बाहर भी प्रदर्शन किया गया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया. भारतीय महिला फेडरेशन की राष्ट्रीय सचिव निशा सिद्दू ने कहा कि हमारे अन्न के भंकार भरे पड़े हैं लेकिन हमारे देश के लोग भूख से मर रहे हैं यह बहुत ही शर्म की बात है. इसलिए सभी को भरपूर अनाज, दाल और तेल सभी को दिया जाये. 

जन संगठनों ने प्रदेश भर में किया प्रदर्शन
जयपुर शहर में निर्माण एंव जनरल मजदूर यूनियन, राजस्थान महिला घरेलु कामगार यूनियन की ओर से डीसीएम, मुस्लिम महिला वेलफेयर सोसाइटी की ओर से बड़ी चौपड़ के पास,  राजसमन्द महिला मंच की और से राजसमन्द में मजदूर किसान शक्ति संगठन की ओर से भीम पंचायत समिति मुख्यालय, राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन की ओर से भीलवाडा जिले की मांडल, अजमेर जिले की जवाजा पंचायत समिति की विभिन्न ग्राम पंचायत मुख्यालय एवं महात्मा गांधी नरेगा के कई कार्य स्थलों पर तख्तियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया. 

महिला जन अधिकार समिति एंव पीयूसीएल अजमेर इकाई ने अजमेर जिला कलेक्टर के बाहर, अलवर जिले की किशनगढ़ बास पंचायत समिति मुख्यालय पर, वागड़ मजदूर किसान संगठन द्वारा डूंगरपुर एवं बिच्छीवाडा, महिला एंव बाल चेतना समिति व पीयूसीएल जिला इकाई भीलवाडा द्वारा, जाग्रत महिला संगठन द्वारा किशनगंज एंव शाहाबाद और केलवाडा में, अवेध खनन विरोधी समिति शुक्लावास एंव पिचानी ने कोटपुतली में, इब्तदा और अन्य संगठनो की और से अलवर में, सार्ड संस्थान रेवदर सिरोही आदि ने भी विरोध प्रदर्शन कर सम्बधिंत अधिकारियो को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया.

जन संगठनों की प्रधानमंत्री से प्रमुख मांग
1. हर नागरिक को पूरे भोजन का अधिकार है उसे 10 किलो अनाज, 1.5 दाल, 800 ग्राम  तेल प्रतिमाह दिया जाए.

2. हर बेरोजगार श्रमिक के लिये हर राज्य में 30 जून तक मुफ्त परिवहन हो और केंद्र सरकार मुफ्त ट्रेन चलाए.

3. प्रवासी मजदूरों का मार्च, अप्रैल, मई माह का पूरा वेतन दिया जिस प्रकार गृह मंत्रालय के आदेश में आदेशित किया गया है. 

4. आखिरी बचे सभी प्रवासी मजदूरों को चाहे वे एक राज्य से दूसरे राज्य में जान चाहते हों या एक जले से दूसरे जिले में जन चाहते हों उन्हें मुफ्त रेल या बस व्यवस्था गाव/घर तक पहुंचाए.

5. राज्य सरकारें सर्वोच्च अदालत के 28.5.2020 के आदेशों का पालन करे और केंद्र सरकार प्रधानमंत्री कल्याण या अन्य फंड उपलब्ध कराएं.

6. श्रम कानूनों का पूरा पालन हो कोई भी श्रम कानून निरस्त नहीं किया जाये. 

7. हर नागरिक के (किसान, मजदूर या स्वयंरोजगारी) खाते में, टैक्स देने वाले को छोड़कर, 7000/- रु. खाते में डाले जाएं. 

8. लॉकडाऊन के असर से सफर में या कहीं मृत्यु हुए मजदूरों या अन्य के परिवार कम से कम 5 लाख रुपये दिए जाएँ.

9. पलायन खत्म हो, हर गाव, मुहल्ला / नगर में स्थानीय रोजगार निर्माण और मनरेगा का में काम दिया जाये.

10. महात्मा गाँधी नरेगा में इस वर्ष कम से कम 240 दिन का रोज़गार दिया जाये. 

मुख्यमंत्री से की गई यह प्रमुख मांगे
राज्य में कुछ मांगें राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से की गई और उनके नाम भी एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को दिया गया.

1. राशन वितरण की व्यवस्था में जोड़े जाने वाली 18 श्रेणियों के सभी लोगों को जोड़ा जाये इसे यूनिवर्सल (सार्वभौमिक) किया जाए.

2. सभी प्रवासी परिवारों को अन्य राज्यों अथवा अन्य जिलों से आए है उन सभी को खाध्य सुरक्षा की सूची में जोड़ा जाये और उन्हें अविलम्ब राशन दिया जाए.

3. NFSA में वर्णित श्रेणियां जिसमें जो सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारी, महानरेगा में 2009-10 के बाद किसी भी वर्ष में 100 दिन मजदूरी की हों, श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिक है इन सभी श्रेणियों के डाटाबेस डिजिटली उपलब्ध है अथवा  राज्य सरकार के छोटे से प्रयास से उपरोक्त वर्णित समुदाय के जन आधार कार्ड / DoIT या NIC द्वारा app की सहायता से ऐसे लोगों की सूची को निकाल कर इन लोगों का खाद्य सुरक्षा में ऑटोमैटिक समावेशन किया जाये. 

4. इसके अतिरिक्त भूमिहीन एवं सीमांत कृषक, कच्ची बस्ती में निवास करने वाले सर्वेक्षित परिवार, कचरा बीनने वाले परिवार, घुमंतू परिवार आदि 20 प्रकार की श्रेणिया है उन सभी को सर्वप्रथम खाद्य सुरक्षा में शामिल किया जाये.

5.सरकार ने उक्त आदेश में कहा है कि मई, जून माह में ही राशन वितरण किया जायेगा. हमारी मांग है कि यदि कोई प्रवासी समय रहते पंजीकरण नहीं करा पाया है तो उन्हें जून माह के बाद भी राशन दिया जाये.

6. आंगनवाडी केन्द्रों अथवा स्कूलों पर सामुदायिक रसोई का सञ्चालन नियमित किया जाये जिससे किसी भी भूखे व्यक्ति को वहां खाना उपलब्ध हो सके. 

7. आंगनवाड़ी में पूरा पोषाहार दिया जाये.  

8. वर्तमान में जिन को भी राशन के गेहूं, दाल आदि एवं आंगनवाडी से जो भी खाद्यान वितरित किया जा रहा है उन सभी लाभार्थियों की सूचि उचित मूल्य की दुकान के बाहर चस्पा की जाये जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके. साथ ही शिकायत निवारण की पुख्ता व्यवस्था की जाये. 

इन सभी मांगों पर उचित कार्यवाही कर वंचित परिवारों को राशन दिलाने की व्यवस्था करवाएं. 

 

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